आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

Social Media Poetry: भावनाओं पर नियंत्रण कर नहीं पाये कभी भी

वायरल काव्य
                
                                                         
                            देह पानी थी हमें इक दूसरे की, पा चुके हैं 
                                                                 
                            
क्यों न अब हम प्यार का नाटक 
यहीं पर खत्म कर दें ! 

प्यार को बदनाम करने में कसर हमने न छोड़ी
वासनाओं  को  रुपहले  आवरण हमने दिये हैं 
भावनाओं पर नियंत्रण कर नहीं पाये कभी भी 
सभ्यता के साथ वर्जित आचरण हमने किये हैं 

हम तुम्हारा तुम हमारा मन बहुत बहला चुके हैं 
चिह्न सब सम्बंध के वाचक 
यहीं पर खत्म कर दें ! 

आग  से  पानी  मिलाकर देखना ही था हमें तो 
भाप बनकर उड़ गयी हर एक जिज्ञासा हमारी 
है बहुत संभव कि हम इक दूसरे को मार डालें
अब बदलने भी लगी है दिन ब दिन भाषा हमारी

स्वप्न में देखे गये वे चित्र सब धुँधला चुके हैं 
जो गढ़े थे प्यार के मानक 
यहीं पर खत्म कर दें !  आगे पढ़ें

2 वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर