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Wasi Shah Poetry: ये जो चेहरे से तुम्हें लगते हैं बीमार से हम

wasi shah famous urdu poetry ye jo chehre se tumhein lagte hain bemar se hum
                
                                                         
                            


ये जो चेहरे से तुम्हें लगते हैं बीमार से हम
ख़ूब रोए हैं लिपट कर दर-ओ-दीवार से हम

यार की आँख में नफ़रत ने हमें मार दिया
मरने वाले थे कहाँ यार की तलवार से हम

इश्क़ में हुक्म-उदूली भी हमें आती है
टलने वाले तो नहीं हैं तिरे इंकार से हम

रंज हर रंग के झोली में भरे हैं हम ने
जब भी गुज़रे हैं किसी दर्द के बाज़ार से हम

बादशाह शाइ'र-ओ-मजनूँ सभी आते हैं यहाँ
लग के बैठे हैं 'वसी'-शाह के दरबार से हम

2 वर्ष पहले

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