आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

Shariq Kaifi Shayari: यूं भी आवाज़ को ऊंचा नहीं कर पाए हम

उर्दू अदब
                
                                                         
                            यूं भी आवाज़ को ऊंचा नहीं कर पाए हम
                                                                 
                            
अपने गुस्से पे भरोसा नहीं कर पाए हम

आ बदन को ही तेरे हाथ लगा कर देखें
आग पत्थर से तो पैदा नहीं कर पाए हम

शक्ल दुनिया की बदलना तो बहुत दूर की बात
एक कमरे को भी कमरा नहीं कर पाए हम

जिसमे हर बात कही जाती है आसानी से
ऐसे हालात ही पैदा नहीं कर पाए हम

कोई सिक्का नही चादर पे तो हैरत क्या है
इक तमाशा कभी पूरा नहीं कर पाए हम

वो भी उन चंद मरीज़ों में है शामिल शारिक
मुस्कुराकर जिन्हें अच्छा नहीं कर पाए हम

साभार: शारिक़ कैफ़ी की फेसबुक वाल से 
एक वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर