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सरवत हुसैन: भर जाएँगे जब ज़ख़्म तो आऊँगा दोबारा

सरवत हुसैन: भर जाएँगे जब ज़ख़्म तो आऊँगा दोबारा
                
                                                         
                            भर जाएँगे जब ज़ख़्म तो आऊँगा दोबारा 
                                                                 
                            
मैं हार गया जंग मगर दिल नहीं हारा 

रौशन है मिरी उम्र के तारीक चमन में 
इस कुंज-ए-मुलाक़ात में जो वक़्त गुज़ारा 

अपने लिए तज्वीज़ की शमशीर-ए-बरहना 
और उस के लिए शाख़ से इक फूल उतारा 

कुछ सीख लो लफ़्ज़ों को बरतने का सलीक़ा 
इस शुग़्ल में गुज़रा है बहुत वक़्त हमारा 

लब खोले परी-ज़ाद ने आहिस्ता से 'सरवत' 
जों गुफ़्तुगू करता है सितारे से सितारा 
4 वर्ष पहले

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