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राहत इंदौरी की ग़ज़ल- मोहब्बतों के सफ़र पर निकल के देखूँगा

मशहूर शायर राहत इंदौरी
                
                                                         
                            मोहब्बतों के सफ़र पर निकल के देखूँगा
                                                                 
                            
ये पुल-सिरात अगर है तो चल के देखूँगा

सवाल ये है कि रफ़्तार किस की कितनी है
मैं आफ़्ताब से आगे निकल के देखूँगा
 

मज़ाक़ अच्छा रहेगा ये चाँद-तारों से
मैं आज शाम से पहले ही ढल के देखूँगा
 
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3 वर्ष पहले

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