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Khumar Barabankavi Shayari: ख़ुमार बाराबंकवी की ग़ज़लों से चुनिंदा शेर

उर्दू अदब
                
                                                         
                            कहीं शेर ओ नग़्मा बन के कहीं आँसुओं में ढल के 
                                                                 
                            
वो मुझे मिले तो लेकिन कई सूरतें बदल के 

हाल-ए-ग़म कह के ग़म बढ़ा बैठे 
तीर मारे थे तीर खा बैठे 

न तो होश से तआरुफ़ न जुनूँ से आश्नाई 
ये कहाँ पहुँच गए हैं तिरी बज़्म से निकल के आगे पढ़ें

3 वर्ष पहले

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