दिल से दिल का रिश्ता होगा
पूरा जब ये सपना होगा
हर-सू निखरा निखरा होगा
बादल जब भी बरसा होगा
सावन की इस रिम-झिम में वो
सर से पा तक भीगा होगा
और तो याद नहीं पर हम ने
इश्क़ में धोका खाया होगा
मुझ को छोड़ के जाने वाले
इतना तो ये सोचा होता
तेरे बा'द मिरा क्या होगा
बा'द में तू भी रोया होगा
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