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हारिस बिलाल: दुनिया में डूब जाना मगर घर न छोड़ना

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दुनिया में डूब जाना मगर घर न छोड़ना
दरिया की सैर कर के समुंदर न छोड़ना

अपनी तलाश अकेले नहीं कर सकोगे तुम
लेकिन किसी का हाथ पकड़ कर न छोड़ना

इस ज़िंदगी की दौड़ के अपने उसूल हैं
सारे उमीद-वार बराबर न छोड़ना

अपने पराए की न रहेगी कोई तमीज़
बाहर के पहरे-दार को अन्दर न छोड़ना

नफ़रत के वास्ते भी वसीला तो चाहिए
मेरा ये मशवरा है कि मिम्बर न छोड़ना

आख़िर ज़मीन ही ने कहा आसमान से
मेरे मु'आमलात को मुझ पर न छोड़ना

चीज़ों से मुख़्तलिफ़ है ये लोगों का मसअला
बेहतर के वास्ते कभी कमतर न छोड़ना

एक घंटा पहले

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