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Mir Taqi Mir: हमारे आगे तिरा जब किसू ने नाम लिया

famous urdu ghazal by mir taqi mir humare aage tera jab kisi ne naam liya
                
                                                         
                            
हमारे आगे तिरा जब किसू ने नाम लिया
दिल-ए-सितम-ज़दा को हम ने थाम थाम लिया

क़सम जो खाइए तो ताला-ए-ज़ुलेख़ा की
अज़ीज़-ए-मिस्र का भी साहब इक ग़ुलाम लिया

ख़राब रहते थे मस्जिद के आगे मय-ख़ाने
निगाह-ए-मस्त ने साक़ी की इंतिक़ाम लिया

वो कज-रविश न मिला रास्ते में मुझ से कभी
न सीधी तरह से उन ने मिरा सलाम लिया

मज़ा दिखावेंगे बे-रहमी का तिरी सय्याद
गर इज़्तिराब-ए-असीरी ने ज़ेर-ए-दाम लिया

मिरे सलीक़े से मेरी निभी मोहब्बत में
तमाम उम्र मैं नाकामियों से काम लिया

अगरचे गोशा-गुज़ीं हूँ मैं शाइरों में 'मीर'
प मेरे शोर ने रू-ए-ज़मीं तमाम लिया

2 वर्ष पहले

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