आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

कलीम आजिज़: चेहरा तिरा उस रोज़ निखर जाए है प्यारे

kaleem aajiz famous ghazal shaane ka bahut khoon e jigar jaaye hai pyare
                
                                                         
                            


शाने का बहुत ख़ून-ए-जिगर जाए है प्यारे
तब ज़ुल्फ़ कहीं ता-ब-कमर जाए है प्यारे

जिस दिन कोई ग़म मुझ पे गुज़र जाए है प्यारे
चेहरा तिरा उस रोज़ निखर जाए है प्यारे

इक घर भी सलामत नहीं अब शहर-ए-वफ़ा में
तू आग लगाने को किधर जाए है प्यारे

रहने दे जफ़ाओं की कड़ी धूप में मुझ को
साए में तो हर शख़्स ठहर जाए है प्यारे

वो बात ज़रा सी जिसे कहते हैं ग़म-ए-दिल
समझाने में इक उम्र गुज़र जाए है प्यारे

हर-चंद कोई नाम नहीं मेरी ग़ज़ल में
तेरी ही तरफ़ सब की नज़र जाए प्यारे

हमारे यूट्यूब चैनल को Subscribe करें।

7 घंटे पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर