अमर उजाला शब्द सम्मान 2018 के अंतर्गत शब्द सम्मान के रूप में छः अलंकरणों की स्थापना की गई है। यह सम्मान अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से हर साल दिया जाएगा। सम्मान के अंतर्गत साहित्य के दो सर्वोच्च सम्मान, एक हिंदी और एक किसी अन्य भारतीय भाषा में सतत् विशिष्ट रचनात्मक योगदान के लिए दिया जाएगा। सम्मान राशि के रूप में 5-5 लाख रुपए अर्पित किए जाएंगे।
यही नहीं एक अलंकरण हिंदी में किसी भी लेखक की पहली कृति के लिए प्रदान किया जाएगा। तीन अलंकरण, कथा-कविता और गैर कथा श्रेणियों में साल की श्रेष्ठतम् कृतियों को समर्पित किए जाएंगे। इसके अतिरिक्त एक विशेष अलंकरण अनुवादित रचना को समर्पित होगा।
ये सभी सम्मान एक-एक लाख रुपए की राशि के सम्मान के साथ समर्पित किए जाएंगे। इन सम्मानों के चुनाव के लिए एक निर्णायक मंडल का गठन किया गया है, जिसमें वरिष्ठ आलोचक से लेकर प्रख्यात कथाकार, विख्यात कवि, सुप्रसिद्ध आलोचक, प्रसिद्ध समीक्षक कवि मौजूद थें। आइए जानते हैं कि किस रचनाकर को क्यों और किस आधार पर सम्मान के लिए चुना गया।
श्रेष्ठ कृति सम्मान छाप कथा- निर्णायक ज्ञानरंजन, प्रख्यात कथाकार
फुगाटी का जूता (मनीष वैद्य) - मेरी समझ और राय में प्रस्तावित कृतियों में सर्वोत्तम ‘छाप’ वाली कहानियां हैं। क्यों? ये कहानियां नूतन, कल्पनाशील, व्यंग्य और भाषा शिल्प के साथ एक तरह का मास्टर स्ट्रोक हैं। इसमें देश और समाज के लिए आवाजें हैं। हुनरमंद कारीगरों, छोटे रोजगार वाले और कारपोरेट की धूम सभी का कहानियों में दायरा है। इनका कैनवस बड़ा है और ये मनुष्यता को बचाने का छोटा-सा प्रयास कर रही हैं। लेखक विकास की मौजूद अवधारणा का क्रिटिक है। इन कहानियों की वस्तु समग्र है और अगर एक पहलू कमजोर है तो दूसरा पहलू उसकी क्षतिपूर्ति करता है। यह कहानी का खेल है, कौशल है, यही उसकी कीमत है। कहानियों में गहरा सरोकार है और इसका कथाकार जागरूक प्राणी है।
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