'हिंदी हैं हम' शब्द शृंखला में आज का शब्द है- प्रण, जिसका अर्थ है- किसी काम को करने के लिए किया हुआ अटल निश्चय, प्रतिज्ञा, दृढ़ संकल्प। प्रस्तुत है अनुराधा पाण्डेय की कविता- प्राण तुझको दिया तो दिया इस तरह
प्राण तुझको दिया तो दिया इस तरह,
भान होता रहा कुछ दिया ही नहीं।
छुद्र मेरा समर्पण न उस योग्य था,
है चरम देवता तू, सतत ये लगा।
विश्व ब्रह्माण्ड में और कुछ भी नहीं,
हर जगह ही लगा मात्र तू ही पगा।
प्रीत तुझसे हुई पर लगा आयु भर-
भूल जाऊँ पृथल, प्रण लिया ही नहीं।
प्राण तुझको दिया तो दिया इस तरह,
भान होता रहा कुछ दिया ही नहीं।
लोग कहते रहे यह पृथक बात है,
मात्र तेरी करूँ रात दिन वंदना।
पर हमेशा लगा कुछ कमी रह गई,
योग्य मेरी नहीं थी अथक साधना।
कोटि मैंने किये साध तेरे लिए
किन्तु ऐसा लगा कुछ किया ही नहीं।
प्राण तुझको दिया तो दिया इस तरह,
भान होता रहा कुछ दिया ही नहीं।
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