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आज का शब्द: शेष और सर्वेश्वरदयाल सक्सेना की कविता- क्या गजब का देश है

आज का शब्द
                
                                                         
                            शेष यानी बाकी अंश या बचा हुआ भाग, अवशिष्ट भाग। अमर उजाला 'हिंदी हैं हम' शब्द श्रृंखला में आज का शब्द है- शेष। प्रस्तुत है सर्वेश्वरदयाल सक्सेना की कविता: क्या गजब का देश है....
                                                                 
                            

क्या गजब का देश है यह क्या गजब का देश है।
बिन अदालत औ मुवक्किल के मुकदमा पेश है।
आँख में दरिया है सबके
दिल में है सबके पहाड़
आदमी भूगोल है जी चाहा नक्शा पेश है।
क्या गजब का देश है यह क्या गजब का देश है।

हैं सभी माहिर उगाने
में हथेली पर फसल
औ हथेली डोलती दर-दर बनी दरवेश है।
क्या गजब का देश है यह क्या गजब का देश है।

पेड़ हो या आदमी
कोई फरक पड़ता नहीं
लाख काटे जाइए जंगल हमेशा शेष हैं।
क्या गजब का देश है यह क्या गजब का देश है।
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4 वर्ष पहले

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