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आज का शब्द: प्रभूत और सुमित्रानंदन पंत की कविता 'तारों का नभ'

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हिंदी हैं हम शब्द-शृंखला में आज का शब्द है - प्रभूत जिसका अर्थ है - 1. बहुत अधिक 2. उत्पन्न 3. पूरा 4. पका हुआ। कवि सुमित्रानंदन पंत ने अपनी कविता में इस शब्द का प्रयोग किया है। 
तारों का नभ! तारों का नभ!
सुन्दर, समृद्ध आदर्श सृष्टि!
जग के अनादि पथ-दर्शक वे,
मानव पर उनकी लगी दृष्टि!
वे देव-बाल भू को घेरे
भावी भव की कर रहे पुष्टि!
सेबों की कलियों-सा प्रभूत
वह भावी जग-जीवन-विकास!
मानव का विश्व-मिलन पवित्र,
चेतन आत्माओं का प्रकाश!
तारों का नभ! तारों का नभ!
अंकित अपूर्व आदर्श-सृष्टि!
शाश्वत शोभा का खिला अदन,
अब होने को है पुष्प-वृष्टि!
चाँदनी चेतना की अमन्द
अग-जग को छू दे रही तुष्टि! 
 

4 महीने पहले

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