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आज का शब्द: निधि और गिरिजाकुमार माथुर की कविता विदा समय क्यों भरे नयन हैं

aaj ka shabd nidhi girijakumar mathur hindi kavita vida samay kyon bhare nayan hain
                
                                                         
                            हिंदी हैं हम शब्द-श्रृंखला में आज का शब्द है - निधि जिसका अर्थ है 1. कोष 2. पूंजी 3. कुबेर के नौ रत्न 4. समुद्र। कवि गिरिजाकुमार माथुर ने अपनी कविता में इस शब्द का प्रयोग किया है। 
                                                                 
                            

विदा समय क्यों भरे नयन हैं

अब न उदास करो मुख अपना
बार-बार फिर कब है मिलना
जिस सपने को सच समझा था -
वह सब आज हो रहा सपना
याद भुलाना होंगी सारी
भूले-भटके याद न करना
चलते समय उमड़ आए इन पलकों में जलते सावन हैं।

कैसे पी कर खाली होगी
सदा भरी आंसू की प्याली
भरी हुई लौटी पूजा बिन
वह सूनी की सूनी थाली
इन खोई-खोई आंखों में -
जीवन ही खो गया सदा को
कैसे अलग अलग कर देंगे
मिला-मिला आंखों की लाली
छूट पाएंगे अब कैसे, जो अब तक छूट न सके बन्धन हैं।

जाने कितना अभी और
सपना बन जाने को है जीवन
जाने कितनी न्यौछावर को
कहना होगा अभी धूल कन
अभी और देनी हैं कितनी -
अपनी निधियां और किसी को
पर न कभी फिर से पाऊंगा
उनकी विदा समय की चितवन
मेरे गीत किन्हीं गालों पर रुके हुए दो आंसू कन हैं
विदा समय क्यों भरे नयन है
4 वर्ष पहले

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