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आज का शब्द: नख और शिवमंगल सिंह सुमन की कविता- व्याकुल वसुंधरा की काया

आज का शब्द
                
                                                         
                            

'हिंदी हैं हम' शब्द श्रृंखला में आज का शब्द है- नख, जिसका अर्थ है- नाखून, एक प्रसिद्ध गंध द्रव्य, खंड, टुकड़ा। प्रस्तुत है शिवमंगल सिंह सुमन की कविता- व्याकुल वसुंधरा की काया 

लौह-पदाघातों से मर्दित
हय-गज-तोप-टैंक से खौंदी
रक्तधार से सिंचित पंकिल
युगों-युगों से कुचली रौंदी।

व्याकुल वसुंधरा की काया
नव-निर्माण नयन में छाया।

कण-कण सिहर उठे
अणु-अणु ने सहस्राक्ष अंबर को ताका
शेषनाग फूत्कार उठे
साँसों से निःसृत अग्नि-शलाका।

धुआँधार नभी का वक्षस्थल
उठे बवंडर, आँधी आई,
पदमर्दिता रेणु अकुलाकर
छाती पर, मस्तक पर छाई।

हिले चरण, मतिहरण
आततायी का अंतर थर-थर काँपा
भूसुत जगे तीन डग में ।
बावन ने तीन लोक फिर नापा।

धरा गर्विता हुई सिंधु की छाती डोल उठी है।
आज देश की मिट्टी बोल उठी है।
 

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3 वर्ष पहले

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