'हिंदी हैं हम' शब्द शृंखला में आज का शब्द है- क्लांति, जिसका अर्थ है- थकावट। प्रस्तुत है अज्ञेय की कविता- वन झरने की धार
मुड़ी डगर
मैं ठिठक गया
वन-झरने की धार
साल के पत्ते पर से
झरती रही
मैंने हाथ पसार दिये
वह शीतलता चमकीली
मेरी अंजुरी
भरती रही
गिरती बिखरती
एक कलकल
करती रही
भूल गया मैं क्लांति, तृषा,
अवसाद,
याद
बस एक
हर रोम में
सिहरती रही
लोच भरी एड़ियां
लहराती
तुम्हारी चाल के संग-संग
मेरी चेतना
विहरती रही
आह! धार वह वन झरने की
भरती अंजुरी से
झरती रही
और याद से सिहरती
मेरी मति
तुम्हारी लहराती गति के
साथ विचरती रही
मैं ठिठक रहा
मुड़ गयी डगर
वन झरने सी तुम
मुझे भिंजाती
चली गयीं
सो... चली गयीं...
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