'हिंदी हैं हम' शब्द शृंखला में आज का शब्द है- गौरी, जिसका अर्थ है- माँ दुर्गा का एक नाम, पार्वती। प्रस्तुत है संजय तिवारी की कविता- तुम्हें पता है मैं सोती नहीं हूँ
तुम्हें पता है
मैं सोती नही हूँ
इसीलिए कभी रोती नहीं हूँ
आँसू
जीवन नहीं होते
जो जीवन में हैं वे कभी नहीं रोते
आँसू
संवेदनाओं की शव यात्रा हैं
नयनप्रवाह की सुनिश्चित मात्रा हैं
इन पर न जाना
इनसे कुछ नहीं पाना
जीने के लिए मेरा प्रवाह देखो
किनारों के मिलने की चाह देखो
पूरी राह पास में
मिलन की आस में
चलते रहते हैं
हर परिस्थिति में ढलते रहते हैं
कभी इन्हें मिलते भी देखा है?
इनके न मिलने में ही मेरी जीवन रेखा है
कभी यदि ये संयम से हिल गए
संयोगात मिल गए
क्या बचेगा?
मेरा अस्तित्व फिर कौन रचेगा?
मैं जीवन देने आयी
केवल मृत्यु ढो रही हूँ
गंगा होकर भी
तुम्हें लगता है रो रही हूँ
ऐसा नहीं है
कुछ भी काल जैसा नहीं है
तुम नहीं थे, मैं तब भी रही हूँ
ऐसे ही बही हूँ
शिव केशपाश में गही हूँ
जहाँ थी वहीं हूँ
गौरी से कोई डाह नहीं है
जटाओं से इतर कोई चाह नहीं है
शिव का संवाद हूँ
धाराओं में लिए
अनहद नाद हूँ
ब्रह्मा की बेटी
भीष्म की माता
मानव से यही नाता
न मैं पुण्य की साक्षी हूँ न पाप की
न आशीर्वाद की न शाप की
हे मनुष्य, मुझे कितना जान सकोगे
जितना जानोगे,उतना ही मान सकोगे
भक्ति और मुक्ति का विधान हूँ मैं
गंगा हूँ पुत्र
जीवन का संविधान हूँ मैं
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