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आज का शब्द: दुकूल और रामधारी सिंह "दिनकर" की कविता- गा रही कविता युगों से मुग्ध हो

आज का शब्द
                
                                                         
                            'हिंदी हैं हम' शब्द शृंखला में आज का शब्द है- दुकूल, जिसका अर्थ है- वस्त्र, कपड़ा, स्त्रियों के पहनने की साड़ी। प्रस्तुत है रामधारी सिंह 'दिनकर' की कविता-  गा रही कविता युगों से मुग्ध हो 
                                                                 
                            

गा रही कविता युगों से मुग्ध हो,
मधुर गीतों का न पर, अवसान है।
चाँदनी की शेष क्यों होगी सुधा,
फूल की रुकती न जब मुस्कान है?

चन्द्रिका किस रूपसी की है हँसी?
दूब यह किसकी अनन्त दुकूल है?
किस परी के प्रेम की मधु कल्पना
व्योम में नक्षत्र, वन में फूल है?

नत-नयन कर में कुसुम-जयमाल ले,
भाल में कौमार्य की बेंदी दिये,
क्षितिज पर आकर खड़ी होती उषा
नित्य किस सौभाग्यशाली के लिए?

धान की पी चन्द्रधौत हरीतिमा
आज है उन्मादिनी कविता-परी,
दौड़ती तितली बनी वह फूल पर,
लोटती भू पर जहाँ दूर्वा हरी ।

2 वर्ष पहले

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