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आज का शब्द: दृष्टिगोचर और हरिवंशराय बच्चन की कविता- पंथ जीवन का चुनौती दे रहा है हर कदम पर

आज का शब्द
                
                                                         
                            'हिंदी हैं हम' शब्द श्रृंखला में आज का शब्द है- दृष्टिगोचर, जिसका अर्थ है- जो देखने में आए। प्रस्तुत है हरिवंशराय बच्चन की कविता- पंथ जीवन का चुनौती दे रहा है हर कदम पर
                                                                 
                            

पंथ जीवन का चुनौती दे रहा है हर कदम पर,
आखिरी मंजिल नहीं होती कहीं भी दृष्टिगोचर,
धूलि में लद, स्वेद में सिंच हो गई है देह भारी,
कौन-सा विश्वास मुझको खींचता जाता निरंतर?-
पंथ क्या, पंथ की थकान क्या,
स्वेद कण क्या,
दो नयन मेरी प्रतीक्षा में खड़े हैं।

एक भी संदेश आशा का नहीं देते सितारे,
प्रकृति ने मंगल शकुन पथ में नहीं मेरे सँवारे,
विश्व का उत्साहवर्धक शब्द भी मैंने सुना कब,
किंतु बढ़ता जा रहा हूँ लक्ष्य पर किसके सहारे?-
विश्व की अवहेलना क्या,
अपशकुन क्या,
दो नयन मेरी प्रतीक्षा में खड़े हैं।
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3 वर्ष पहले

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