'हिंदी हैं हम' शब्द श्रृंखला में आज का शब्द है- दृढ़, जिसका अर्थ है- अच्छी तरह बँधा या मिला हुआ, प्रगाढ़, पुष्ट, मजबूत, निश्चित, ध्रुव, पक्का। प्रस्तुत है माखनलाल चतुर्वेदी की कविता- यह गुंजार कहाँ से आयी
यह गुंजार कहाँ से आयी
चौंक पड़ा, मैं बोल उठा,
कँपने लगा हृदय, हरि जाने
मैं भय-विह्वल डोल उठा!
'फिर कुछ बजा', सोच कर मन में
फिर मैं कुछ-कुछ जान गया;
'वीणा की झंकार हुई है', यही
बात अनुमान गया!
'निष्ठुर बड़ा बजानेवाला'
यों कह दौड़ा ध्वनि की ओर,
किंतु मध्य में रुका, सुना—
जब पकड़ो-मारो का कुछ शोर;
ज्यों-त्यों लड़ता-भिड़ता पहुँचा
मैं प्यारी वीणा के पास,
किंतु मातु को पा उदास
मन सूख गया, हो गया निराश;
झंझावात भयानक ही से
बजते थे वे सारे तार,
मची हुई थी समय राज की
उन तारों पर मारामार;
हाँ अवश्य अकुलाते थे वे
निकल रही थी गहरी आह,
मै भी बना वहाँ पर जाकर
उस प्यारी वीणा का तार;
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