'हिंदी हैं हम' शब्द शृंखला में आज का शब्द है- चित्र, जिसका अर्थ है- रेखाओं या रंगों के माध्यम से बनी हुई किसी वस्तु की आकृति या तस्वीर। प्रस्तुत है अज्ञेय की कविता- मुझे देख कर नयन तुम्हारे मानो किंचित् खिल जाते हैं
मुझे देख कर नयन तुम्हारे मानो किंचित् खिल जाते हैं,
मौन अनुग्रह से भर कर वे अधर तनिक-से हिल जाते हैं।
तुम हो बहुत दूर, मेरा तन अपने काम लगा रहता है-
फिर भी सहसा अनजाने में मन दोनों के मिल जाते हैं,
इस प्रवास में चित्र तुम्हारा बना हुआ है मेरा सहचर,
इसीलिए यह लम्बी यात्रा नहीं हुई है अब तक दूभर।
इस उन्मूलित तरु पर भी क्यों खिलें न नित्य नयी मंजरियाँ-
छलकाने को स्नेह-सुधा जब छवि तेरी रहती चिर-तत्पर?
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