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                                                                           “लाखों क्रौंच कराह रहे हैं,
जाग, आदि कवि की कल्याणी?
फूट-फूट तू कवि-कंठों से,
बन व्यापक निज युग की वाणी।“

कविता वह है जो अपने युग की वाणी बने। अपने दौर के हर वर्ग और शोषितों की हक़ में उठे। समाज में व्याप्त पाखंड औ...और पढ़ें
2 months ago
                                                                           ज्यादा बड़ी नहीं तो एक भेट छोटी ही दे दो ,
किसी गरीब को एक वक़्त की रोटी ही दे दो...और पढ़ें
4 months ago
                                                                           आसमान की गहराइयों को उन्मुक्त नापते पक्षियों को देख और पेड़ों की शाखाओं पर बैठे उन्हें चहचहाते सुन किसका मन खुशी से नहीं खिल जाता? दुर्भाग्यवश, बहुत लोग चाव से उन्हें घर में  पिंजरे में कैद कर पालते भी हैं। तोता-मैना जैसे पक्षियों से तो हम बड़े प्यार स...और पढ़ें
                                                
4 months ago
                                                                           जहां अपनो की याद न आए वो तन्हाई किस काम की,
बिगड़े रिश्ते न बने तो खुदाई किस काम की
बेशक अपनी मंज़िल तक जाना है
पर जहाँ से अपने ना दिखे वो ऊंचाई किस काम की..


-हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है।...और पढ़ें
5 months ago
                                                                           खोटा सिक्का भी एक दिन बेधड़क चलेगा
वक़्त के साथ तेरा भी एक दिन वजूद बनेगा
खुदा से फरियाद कर हर बिगड़ा काम बनेगा
निकल राह पर वक़्त कम है रे मीत मेरे!
यक़ीनन तेरा भी एक स्वर्णिम दौर आएगा

बरसो से इस चेहरे पर पड...और पढ़ें
5 months ago
                                                                           इतने कमज़ोर मत बनो कि कोई आपको तोड़ सके बल्कि इतने मज़बूत बनो कि आपको तोड़ने वाला ख़ुद ही टूट जाए। 
- अज्ञात ...और पढ़ें
5 months ago
                                                                           मेरे मन में,
तुम्हारे मन में, हम सभी के मन में,
एक महत्वकांक्षी देश समाया है,
जहाँ पर नदियों को मां के रूप में सम्मान मिलता है,
जहां आध्यात्मिकता का एक अलग ही अर्थ मिलता है
जी हाँ, हम सबके मन में वह गौरवशाली भारत सम...और पढ़ें
5 months ago
                                                                           शैलेश मटियानी का मूल नाम रमेश चंद्र मटियानी था, लेकिन मशहूर हुए शैलेश मटियानी के नाम से ही। शैलेश हिंदी साहित्य जगत में नई कहानी विधा के अग्रणी कथाकार थे। उन्होंने कविताएं भी लिखी हैं। जनकवि बाबा नागार्जुन उन्हें 'हिंदी का गोर्की' कहते थे। शै...और पढ़ें
                                                
7 months ago
                                                                           कश्तियाँ सब की किनारे पे पहुँच जाती हैं
नाख़ुदा जिन का नहीं उन का ख़ुदा होता है
- अमीर मीनाई 


कोशिश भी कर उमीद भी रख रास्ता भी चुन
फिर इस के ब'अद थोड़ा मुक़द्दर तलाश कर
- निदा फ़ाज़ली ...और पढ़ें
8 months ago
                                                                           सच हम नहीं, सच तुम नहीं।
सच है सतत संघर्ष ही।
संघर्ष से हटकर जिए तो क्या जिए हम या कि तुम।
जो नत हुआ वह मृत हुआ ज्यों वृन्त से झरकर कुसुम।
जो पन्थ भूल रुका नहीं,
जो हार देख झुका नहीं,
जिसने मरण को भी लिया हो...और पढ़ें
8 months ago
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