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                                                                           कल की फिक्र में
आज को क्यों खोना
जब आज कुछ
अच्छा कर ही सकते हैं
तो अतीत के ख्यालों में
डूबकर क्यों रोना

ये कीमती वक्त है
सोना से भी अनमोल
इसे खो कर बाद में
फिर मायूस क्यों होना...और पढ़ें
5 days ago
                                                                           जीवन पथ पर बढ़ते रहो
प्रेरणादायक कविता

जीवन पथ पर बढ़ते रहो,
साहस को अपना मित्र बनाओ।
सत्य और सदाचार की ज्योति से,
हर अंधकार को दूर भगाओ।

परिश्रम की पावन गंगा में,
अपने सपनों को नित्य ब...और पढ़ें
2 weeks ago
                                                                           खिलते हैं रोज सुमन
बहते हैं रोज पवन
निकलते हैं रोज सूर्य भगवान
हम क्यों करें आराम

हमें भी अपने हिस्से के
कर्तव्य निभाने होंगे
आलस्य से दूरी बनानी होगी
हिम्मत,हौसलों को अपनाने होंगे
...और पढ़ें
4 weeks ago
                                                                            वर्तिका नंदा की लिखी पुस्तक 'ज से जेल का विमोचन इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (IGNCA)किया गया। यह पुस्तक प्रभात प्रकाशन ने छापी गयी है। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि भारत के सुप्रीम कोर्ट के माननीय न्यायमूर्ति  संदीप मेहता थे। कार्यक्रम की अध...और पढ़ें
                                                
3 months ago
                                                                           समीक्षक - प्रत्युष प्रशांत 

मैं दीवारों पर खिड़कियां लिख रही हूं (कविता संग्रह) - अनामिका अनु
वाणी प्रकाशन, पहला संस्करण 2026

विनोद कुमार शुक्ल के चर्चित उपन्यास 'दीवार में एक खिड़की रहती थी' से बिल्कुल अल...और पढ़ें
3 months ago
                                                                           मधुमेह और उच्च रक्तचाप से पीड़ित व्यक्ति के लिए आहार-योजना पर आधारित प्रेरणादायक कविता—

सुबह सवेरे उठते ही, जल गुनगुना पिया करें,
मधुमेह से मुक्ति के लिए, तन का शोधन किया करें।

चीनी वाली चाय छोड़कर, ग्रीन टी को अप...और पढ़ें
4 months ago
                                                                           गर हो हौसला और दृढ़ निश्चय
पत्थर भी टूटेंगे
मजबूत इरादों के आगे
सब झुकेंगे
इरादें सच्चे और नेक हों तो
मुश्किलों की इतनी औकात कहां
पथरीली राह पर चलकर ही
मनुष्य अपनी मंजिल को छूते हैं
बाधाएं कितनी...और पढ़ें
4 months ago
                                                                           है डगर मुश्किल तो
चलना शुरू क्यों किया
राह में रुक जाना था तो
आगे पांव क्यों किया
मुश्किलों से डर कर
जो रुक जाए
वो इंसान नहीं होता
बिना मेहनत के
सपने साकार नहीं होते
दो-दो कदम आगे
...और पढ़ें
4 months ago
                                                                           द डेंजर टू बी सेनः क्रिएटिविटी एंड द एसेंट्रिक माइंड
लेखिका : रोजा मोंटेरो
प्रकाशक : यूरोपा कंपास

महान लोग थोड़े सनकी क्यों होते हैं

इसी महीने प्रकाशित इस किताब में फ्रांज काफ्का, वर्जीनिया वुल्फ व मार्सेल...और पढ़ें
4 months ago
                                                                           उठो जागो
आगे बढ़ो
हिम्मत करो
बीती बातें
भुला दो
हौसला से
मुरझाया फूल
खिला दो
क्योंकि,
अंत....
तब तक
नहीं होता
जब तक
अंत.....
नहीं होता।।

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5 months ago
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