हिंदी सिनेमा की लोकप्रिय गीतकार माया गोविंद का गुरुवार सुबह निधन हो गया। बतौर गीतकार माया ने फिल्म इंडस्ट्री में खूब काम किया। उन्होंने 'डोंट वरी' और 'बेकसूर' जैसे फिल्मों के गाने लिखे तो दलाल फिल्म का गीत 'अटरिया पे लोटन कबूतर रे' के लिए विवादों में भी रहीं। उन्हें कथक में भी महारत हासिल थी। सुपरहिट धारावाहिकों ‘मायका’ और ‘फुलवा’ के गीत उन्होंने ही लिखे।
लखनऊ में 17 जनवरी 1940 को जन्मी माया गोविंद की रुचि शुरुआत से ही अभिनय व रंगमंच में अधिक रही, जबकि परिवार के लोग उन्हें शिक्षक बनाना चाहते थे। शंभू महाराज की शिष्या रहीं माया ने कथक का खूब अभ्यास किया, साथ ही लखनऊ के भातखंडे संगीत विद्यापीठ से गायन का चार साल का कोर्स भी किया। जब माया इंटर में थीं, तब उनकी शादी हो गई। ससुराल वाले उनसे बिल्कुल आदर्श बहू की तरह रहने की उम्मीद करते थे।
माया सबकुछ करने की कोशिश भी कर रही थीं। मगर इस सबके साथ माया गाना चाहती थीं। उनके ससुराल वाले इसके खिलाफ थे। इसी वजह से तीन महीने बाद माया वापस घर लौट आईं। घर आने के बाद उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी। स्नातक और बीएड करने के बाद वो टीचर बन गईं। इसी दौरान अपनी दोनों छोटी बहनों की शादी भी करवाई। जीवन में उतार- चढ़ाव आते रहे, आगे चलकर उनकी मुलाकात राम गोबिंद हुई, जिनसे उनकी भी शादी हुई। राम गोबिंद भी नाटक लिखते हैं।
बतौर गीतकार माया गोविंद का करियर 1972 में शुरू हुआ । उन्होंने फिल्म ‘आरोप’ के गाने लिखे। इस फिल्म से उनका गाना ‘नैनों में दर्पण है’ बहुत चर्चित हुआ। यहां से माया का फिल्मों में गाने लिखने का काम शुरू हुआ। उन्होंने अपने करियर में 350 फिल्मों के लिए 750 से ज़्यादा गाने लिखे। इसमें ‘आंखों में बसे हो तुम’, ‘मैं खिलाड़ी तू अनाड़ी’ फिल्म का टाइटल ट्रैक, हम तुम्हारे हैं सनम फिल्म का ‘गले में लाल टाई’, शीशा फिल्म का ‘यार को मैंने मुझे यार ने’ जैसे गाने शामिल हैं। जब समय के साथ संगीत बदलने लगा तब भी माया ने पॉपुलर सिंगर फाल्गुनी के गाने ‘मैंने पायल है छनकाई’ के बोल लिखे, जो कि बहुत बड़ा हिट गाना साबित हुआ। नवरात्रि से इतर लोग फाल्गुनी को आज भी उसी गाने से याद करते हैं।
साल 1970 में संगीत नाटक अकादमी लखनऊ ने उन्हें विजय तेंदुलकर के नाटक के हिंदी रूपातरण ‘खामोश! अदालत जारी है’ में सर्वश्रेष्ठ अभिनय का पुरस्कार दिया। 1988 में राम गोविंद निर्देशित फिल्म ‘तोहफा मोहब्बत का’ में भी उन्होंने एक्टर के तौर पर काम किया और उनके काम को सराहा गया।
दूरदर्शन पर प्रसारित हुए धारावाहिक ‘महाभारत’ के लिए उन्होंने काफी गीत, दोहे और छंद लिखे। इसके अलावा ‘विष्णु पुराण’, ‘किस्मत’, ‘द्रौपदी’, ‘आप बीती’ आदि उनके चर्चित धारावाहिक रहे। सैटेलाइट चैनलों के दौर में भी माया गोविंद के लिखे शीर्षक गीतों की खूब धूम रही।
उन्होंने फिल्म 'आरोप', 'जलते बदन', 'सावन को आने दो', 'बेकाबू, दमन', 'सौतेला', 'रजिया सुल्तान', 'बाल ब्रह्मचारी', 'आर या पार', 'गर्व','लाल बादशाह','याराना' जैसी तमाम हिट फिल्मों के गाने लिखे थे।
90 के दशक की दलाल फ़िल्म में एक गाना था जिस पर अश्लीलता परोसने के आरोप लगे। मिथुन चक्रवर्ती और आयशा जुल्का पर फ़िल्माया गया था। माया गोविंद के लिखे इस गीत के बोल थे,...अटरिया पे लोटन कबूतर रे, पंछी दीवाना चुग कर दाना, उड़ गया फर-फर रे। गाने को बप्पी लहरी ने कंपोज किया था और गाया था अलका याज्ञनिक, बप्पी लाहिरी, इला अरुण और कुमार सानू ने ।
4 वर्ष पहले
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