महिलाएं यानी समाज की आधी आबादी और अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा। कई बड़े विद्वानों, लेखकों व कवियों ने महिलाओं को लेकर अपने विचार सामने रखे हैं।
औरतें प्यार करने के लिए बनी हैं, समझने के लिए नहीं - ऑस्कर वाइल्ड
नारी सदैव अजेय रही हैं. – महादेवी वर्मा
पवित्र नारी सृष्टिकर्ता की सर्वोत्तम कृति होती है; वह सृष्टि के सम्पूर्ण सौन्दर्य को आत्मसात किये रहती है – रवीन्द्रनाथ ठाकुर
नारी की करूणा अंतर्जगत का उच्चतम विकास है जिसके बल पर समस्त सदाचार ठहरे हुए हैं – जयशंकर प्रसाद
प्रेम किस प्रकार किया जाता हैं, इसे केवल नारियाँ ही जानती हैं – मोपासा
सहनशीलता से जीवन की विषम यात्रा को सरल और सुखद बनाना नारी का कार्य है – ग्रियर्सन
नारी को अबला कहना उसका अपमान करना हैं – महात्मा गांधी
यदि कहीं कठोर अत्याचार और दुर्व्यहार के बदले में भी स्नेह और प्रेम हो सकता है, तो वह स्त्रियों में हो सकता है – शरतचन्द्र
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