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मैथिलीशरण गुप्त की प्रेरणात्मक कविता: संभलो कि सुयोग न जाय चला

मैथिलीशरण गुप्त की प्रेरणात्मक कविता: संभलो कि सुयोग न जाय चला
                
                                                         
                            नर हो, न निराश करो मन को
                                                                 
                            

कुछ काम करो, कुछ काम करो
जग में रह कर कुछ नाम करो
यह जन्म हुआ किस अर्थ अहो
समझो जिसमें यह व्यर्थ न हो
कुछ तो उपयुक्त करो तन को
नर हो, न निराश करो मन को।

संभलो कि सुयोग न जाय चला
कब व्यर्थ हुआ सदुपाय भला
समझो जग को न निरा सपना
पथ आप प्रशस्त करो अपना
अखिलेश्वर है अवलंबन को
नर हो, न निराश करो मन को। आगे पढ़ें

5 वर्ष पहले

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