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जब "जिस रात के ख़्वाब आए... गाने के बाद रफ़ी, नौशाद के गले लिपटकर रोने लगे मोहम्मद रफ़ी

मोहम्मद रफ़ी
                
                                                         
                            गुज़रे जमाने के मशहूर संगीतकार नौशाद ने मरहूम मोहम्मद रफ़ी साहब की आवाज के बारे में कहा था- " मोहम्मद रफ़ी की आवाज़ की रेंज को पहचाना नहीं गया था। उनकी आवाज़ कितनी नीचे जा सकती है और कितनी ऊपर जा सकती है, किसी ने ध्यान नहीं दिया था।"
                                                                 
                            

आगे नौशाद बताते हैं- "मैंने उनकी आवाज़ का इस्तेमाल फ़िल्म बैजू बावरा  के गीत 'ओ दुनिया के रखवाले' में किया था। उसी फ़िल्म के भजन 'मन तरपत हरि दर्शन को आज' को राग मालकौंस पर बनाया था जो बहुत ही पवित्र और पाकीज़गी से बनाया गया था।"
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जिस रात के ख़्वाब आए वह रात आई

8 वर्ष पहले

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