आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

अब ऐसा शेर और न पढ़ना, वरना एक-आध जनाज़ा आज मुशायरे से उठेगा…

shayar mushaira in sher o sukhan
                
                                                         
                            

अच्छा शेर पढ़े जाने पर आम तौर पर श्रोताओं में से वाह-वा, सुब्हान अल्लाह, मरहबा आदि का शोर बुलन्द होता है। मगर शायर अपने ही ढंग से दाद देते हैं। इस तरह की दाद की एक ख़याली तस्वीर यहां महसूस करें जिसे पं. दत्तात्रिय कैफ़ी ने खींचा है।

मानो इंशा अल्लाह ख़ान शेर पढ़ते हैं

कमर बांधे हुए चलने को यां सब यार बैठे हैं
बहुत आगे चले गए, बाक़ी जो हैं तैयार बैठे है


अब इस पर शायर दाद देंगे तो कैसे देंगे

सौदा- क्या मतला कहा है?
मीर- लफ़्ज़ है कि तीरो-नश्तर
दर्द- सैयर इन्शा इसकी दाद है छाती कूटना
मुसहफ़ी- वाह क्या हमागीर तबीयत पाई है। क्या दर्दभरा मतला कहा है।

नसीम- बे पनाह मतला हुआ है।
नासिख- वल्लाह दिल भरा आता है।
ज़ौक़- दो मिसरे हैं कि दुधारा तेग़ा, दिल में ख़ुबा जाता है।
ग़ालिब- लुत्फ़ यह कि हुस्ने-अदा कितनी नुदरत लिए हुए है

इंशा-

न छेड़ ऐ निकहते-बादे-बहारी राह लग अपनी
तुम्हें अठखेलियां सूझी हैं हम बेज़ार बैठे हैं

 अब इस पर मीर कहेंगे कि -
शेर है कि दुगाड़ा। अब ऐसा शेर और न पढ़ना, वरना एक आध जनाज़ा आज मुशायरे से उठ जाएगा।


साभार- शेर-ओ-सुख़न
भारतीय ज्ञानपीठ 

7 वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर