मुड़ मुड़ कर देखता हूँ मै उनकाे
जब वो रास्ते में कदम रखते हैं!
मैं पाता हूँ खड़ा उसी जगह
जहां कर वाे गुज़रते है!
मैं करने लगता हूं उनके सामने प्यार की बातें
लेकिन वाे नजरे झुकाकर निकल जाते हैं!
हैं तो मासूम वाे लेकिन अपनी बातों
बाताें से मुकर जाते हैं!
हम उनकाे अपना समझते हैं!
लेकिन वाे इनकार करके निकल जाते हैं!
शायद उनकाे हमारी माेहब्बत पर विश्वास नहीं!
इसलिए मुंह फेर कर निकल जाते हैं!
हम भी करगें अपने दिल से अकेले में बातें
वो इतने नाराज नजर क्यों अाते हैं!
ऐ दिल तुमने तो बसा रखी है उनकी
तसवीर अपने आप में!
क्यों नजरें चुराकर हमारी जिंदगी से दूर जा रहे हैं!
ऐ दिल समझा दे उसकाे जरा कहीं
इस संसार में अकेले ना रह जाए!
हम नहीं जी पाएगें उस मासूम परी के बिना
इस दुनिया में उनकी चंद यादे छाेड़ जायेगे!
जब मेरा जनाजा निकल कर जायेगा उनके घर के सामने से!
देखाें इन्हाेंने वादा किया था,जब तक तुम्हें अपना ना बना लू, इस दुनिया से नहीं जाऊगा!
लाेगाें देखाें आज अपने वादे से मुकर कर जा रहा है!
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