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Ramdhari singh dinkar poetry: जब कोई सर्प चले किसी मनुष्य से मित्रता करने तब क्या होगा ?

                
                                                         
                            राधेय ज़रा हँसकर बोला, रे कुटिल ! बात क्या कहता है?
                                                                 
                            
जय का समस्त साधन नर का, अपनी बाहों में रहता है।
उसपर भी साँपों से मिलकर मैं मनुज, मनुज से युद्ध करूँ?
जीवन-भर जो निष्ठा पाली, उससे आचरण विरुद्ध करूँ?

तेरी सहायता से जय तो, मैं अनायास पा जाऊँगा,
आनेवाली मानवता को, लेकिन क्या मुख दिखलाऊँगा?
संसार कहेगा, जीवन का, सब सुकृत कर्ण ने क्षार किया,
प्रतिभट के वध के लिए, सर्प का पापी ने साहाय्य लिया।
6 घंटे पहले

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