रस्ता है मुश्किल
ख़स्ता है हाल भइया
झंझट ही झंझट, दैया री दैया।
देखा मैंने एक आदमी
पड़ा सड़क के बीच में
खाई चोट कराह रहा था
सना हुआ था कीच में
जाने क्या झंझट हो भइया
जाने कैसा लफड़ा हो
खिसक लिया अनदेखी करके
बना इस घड़ी नीच मैं
राम जाने क्या पूछे सिपइया
रस्ता है मुश्किल
ख़स्ता है हाल भइया
झंझट ही झंझट, दैया री दैया
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