मैं गियुला नाम के एक छोटे से शहर में बड़ा हुआ, जो हंगरी और रोमानिया की सीमा पर स्थित है। मेरी दो किताबें सतांतागो और द मलान्क्ली ऑफ रेजिस्टेंस इसी शहर से प्रभावित है। बीस साल की उम्र से ही मैं अपने दिमाग के भीतर ही काम करता हूं। यह कुछ ऐसा है कि कोई मेरे भीतर लगातार बोलता रहता है। मैं अपने दिमाग में उस आवाज से जुड़ने की कोशिश करता हूं। अगर मैं अपने भीतर उस आवाज या संगीत को समझ पाता हूं और पीछा करता हूं, तो पंद्रह से बीस पृष्ठ तक लगातार लिखता जाता हूं।
इस दुनिया में मेरे अलावा ढेर सारे दिलचस्प लोग हैं...
गद्य लेखन अपने आप में खुद से बाहर आने की एक संभावना है। इस दुनिया में मेरे अलावा ढेर सारे दिलचस्प लोग हैं। मैं यह नहीं कह रहा कि मैं दिलचस्प नहीं हूं, पर दूसरे लोग मुझसे ज्यादा दिलचस्प हैं। मेरे पास गरीबी का एक लंबा अनुभव है। तीस साल का होने पर मैंने खुद को परिपक्व पाया। फिर एक दिन वह भी दिन आया, जब खुद में मेरी दिलचस्पी कम होने लगी। और कुछ दूसरी मानवीय परिस्थितियों ने मुझे गहरे तक उदास किया। और फिर अचानक से मेरे दिमाग में स्पष्टता आई कि इन चीजों के बारे में लिखना है। इसमें समय लगा। धीरे-धीरे मैंने अपने काम को समझा।
मैं इसे बर्दाश्त नहीं कर सकता...
मुझे वह उपन्यास पसंद नहीं, जिसका लेखक के वजूद से सीधा संबंध नहीं होता। मैं इसे बर्दाश्त नहीं कर सकता। लेकिन यह कवियों के साथ कुछ अलग होता है। एक कवि हमारे सामने खुली आत्मा की तरह होता है। अगर मुझे किसी चीज को गहराई तक महसूस करना है, तो किसी कवि को पढ़ता हूं। मैं गद्य और पद्य को बांटने वाली लकीर को अच्छी तरह से देख पाता हूं।
पूरा ब्रह्मांड एक रहस्य है। लावोत्से ने कहा है कि वह काम करो जो पत्थर, नदी या फूल करते हैं। हर बड़े चिंतक ने हमें यह समझाने की कोशिश की है कि कुछ भी अस्तित्व में नहीं और न ही कोई अंतिम सत्य है।
-हंगरी के मशहूर उपन्यासकार
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इस दुनिया में मेरे अलावा ढेर सारे दिलचस्प लोग हैं...
7 वर्ष पहले
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