आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

एक कवि हमारे सामने खुली आत्मा की तरह होता है...

खुली किताब
                
                                                         
                            मैं गियुला नाम के एक छोटे से शहर में बड़ा हुआ, जो हंगरी और रोमानिया की सीमा पर स्थित है। मेरी दो किताबें सतांतागो और द मलान्क्ली ऑफ रेजिस्टेंस इसी शहर से प्रभावित है। बीस साल की उम्र से ही मैं अपने दिमाग के भीतर ही काम करता हूं। यह कुछ ऐसा है कि कोई मेरे भीतर लगातार बोलता रहता है। मैं अपने दिमाग में उस आवाज से जुड़ने की कोशिश करता हूं। अगर मैं अपने भीतर उस आवाज या संगीत को समझ पाता हूं और पीछा करता हूं, तो पंद्रह से बीस पृष्ठ तक लगातार लिखता जाता हूं।
                                                                
                
                
                 
                                    
                     
                                             
                                                

इस दुनिया में मेरे अलावा ढेर सारे दिलचस्प लोग हैं...

गद्य लेखन अपने आप में खुद से बाहर आने की एक संभावना है। इस दुनिया में मेरे अलावा ढेर सारे दिलचस्प लोग हैं। मैं यह नहीं कह रहा कि मैं दिलचस्प नहीं हूं, पर दूसरे लोग मुझसे ज्यादा दिलचस्प हैं। मेरे पास गरीबी का एक लंबा अनुभव है। तीस साल का होने पर मैंने खुद को परिपक्व पाया। फिर एक दिन वह भी दिन आया, जब खुद में मेरी दिलचस्पी कम होने लगी। और कुछ दूसरी मानवीय परिस्थितियों ने मुझे गहरे तक उदास किया। और फिर अचानक से मेरे दिमाग में स्पष्टता आई कि इन चीजों के बारे में लिखना है। इसमें समय लगा। धीरे-धीरे मैंने अपने काम को समझा।
आगे पढ़ें

इस दुनिया में मेरे अलावा ढेर सारे दिलचस्प लोग हैं...

7 वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर