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मानव और मनुष्यता की सेवा ही सृजन का उद्देश्य

ईवो आण्ड्रिच
                
                                                         
                            अतीत और वर्तमान की काल्पनिक सीमा रेखा से परे लेखक अब भी मानव स्थितियों के साथ आंख से आंख मिलाता है, जिन्हें वह अच्छी तरह से देख और समझ सकने के लिए प्रतिबद्ध है, जिनके साथ वह अपनी पहचान बनाता है, जो उसकी सांसों को ताकत और खून को गर्मी देती है, जिन्हें वह अपने पाठकों के लिए कहानी की जीवंत संरचना में बदलने की कोशिश करता है। इस तरह से परिणाम जितना संभव हो, उतना सुंदर और प्रेरक हो सकता है। सवाल यह है कि कोई लेखक कैसे और किन साधनों से इस उद्देश्य तक पहुंच सकता है। किसी को यह उनकी कल्पना से मुफ्त में मिलता है, तो किसी को इतिहास और सामाजिक विकास द्वारा उपलब्ध निर्देशों के लंबे अध्ययन से हासिल होता है। इस उद्देश्य तक पहुंचने के लिए उपन्यासकार के पास हजारों तरीके और साधन हैं, लेकिन सबसे निर्णायक चीज उसका अपना काम है।
                                                                
                
                
                 
                                    
                     
                                             
                                                

हर लेखक कहानी को अपनी आंतरिक जरूरत के हिसाब से रचता है...

सबसे मुख्य बात वह भावना है, जो उसकी कहानी से प्रकट होती है; वह संदेश है, जो उसकी रचना मानव जाति के लिए प्रेषित करती है। हर लेखक कहानी को अपनी आंतरिक जरूरत के हिसाब से रचता है, अपने जन्मजात या अर्जित झुकाव, अपनी धारणाओं और अभिव्यक्ति के साधनों की शक्ति के अनुसार ही लेखक कहानी रचता है। हर लेखक अपनी कहानी की नैतिक जिम्मेदारी स्वीकारता है और उसे स्वतंत्र रूप से अपनी कहानी कहने की अनुमति होनी चाहिए। उम्मीद करनी चाहिए कि आज के लेखकों की कहानी न तो नफरत से और न ही घृणास्पद मशीनों के शोर से धुंधलाएगी, बल्कि आज के लेखकों की कहानी प्यार से पैदा होनी चाहिए और शांत व स्वतंत्र मानव मन के विचारों से प्रेरित होनी चाहिए। किसी भी कथाकार की रचना का कोई मतलब नहीं है, अगर वह मनुष्य और मानवता की सेवा नहीं करता।

-यूगोस्लाविया के नोबेलजयी उपन्यासकार
 
7 वर्ष पहले

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