शब्द ईश्वर के साथ था, जो ईश्वर के वचन को प्रकट करता था, शब्द सृजन था। लेकिन मानव संस्कृति की सदियों की यात्रा के दौरान शब्द ने धार्मिक के साथ-साथ धर्मनिरपेक्ष अर्थ भी ग्रहण किया। यह शब्द मौलिक अधिकार का समानार्थी बनकर आया है, प्रतिष्ठा के साथ, बेहद प्रभावशाली, कभी-कभी खतरनाक दृढ़ता के साथ, प्राइम टाइम की टीवी चर्चा के लिए, बातचीत के लिए उपहार के रूप में शब्द हमारे सामने आया।
यह अब पहले की तुलना में स्वर्ग के काफी करीब है...
शब्द अंतरिक्ष में उड़ान भरता है, इसे उपग्रहों से उछाला जाता है, यह अब पहले की तुलना में स्वर्ग के काफी करीब है, जहां से इसे आया हुआ माना जाता था। लेकिन मेरे लिए यह सबसे महत्वपूर्ण बदलाव है। बहुत पहले इसे पहली बार पत्थर के टुकड़े पर खोदा गया था या पेपिरस पर इसका पता लगा था , फिर जब इसे चमत्कार की तरह बोलने-सुनने के साथ संकेतों की शृंखला के रूप में लिखा जाने लगा और इसकी लिपि बनी। समय के साथ इसने चर्मपत्र से गुटेनबर्ग तक की यात्रा की। यही लेखक के जन्म की भी कहानी है। यह वह कहानी है, जिसने लेखकों को लेखक बनाया।
इस अर्थ में लेखन एक अतुलनीय भागीदारी है...
आश्चर्यजनक रूप से यह एक दोहरी प्रक्रिया थी-इसने एक ही समय लेखक का निर्माण किया और मानव सभ्यता के विकास के लिए लेखक के उद्देश्यों को भी। यह एक तरह से मनुष्य का शारीरिक और मानसिक विकास, दोनों था। मानव की उत्पत्ति और विकास, दोनों की व्याख्या इससे होती है। हम लेखकों का जन्म इसी कार्य के लिए हुआ है। हम अपने समाज और दुनिया का जो अध्ययन करते हैं, उसी की शब्दों के माध्यम से व्याख्या करने में अपना सर्वाधिक समय खर्च करते हैं। इस अर्थ में लेखन एक अतुलनीय भागीदारी है।
-दक्षिण अफ्रीका की नोबेलजयी कथाकार
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यह अब पहले की तुलना में स्वर्ग के काफी करीब है...
8 वर्ष पहले
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