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मां की किताबों ने पढ़ने-लिखने के प्रति उत्साह जगाया

गुंटर ग्रास
                
                                                         
                            जब मैं मात्र बारह वर्ष का था, तभी मुझे एहसास हुआ कि मैं कलाकार बनना चाहता हूं। यह द्वितीय विश्वयुद्ध के समय हुआ। लेकिन अपने लेखन के पेशेवर विकास के लिए मुझे एक साल इंतजार करना पड़ा, जब हिटलर की युवाओं की एक पत्रिका से मुझे एक आकर्षक प्रस्ताव मिला। उसमें एक कहानी प्रतियोगिता आयोजित की गई थी, जिसमें विजेताओं को पुरस्कार दिया जाता। मैं तुरंत अपना पहला उपन्यास लिखने के लिए तैयार हो गया। अपनी मां की पृष्ठभूमि से प्रभावित होकर मैंने इसका नाम काशुबियन रखा। लेकिन इसकी घटनाएं मौजूदा दर्दनाक वक्त की नहीं थीं, बल्कि तेरहवीं शताब्दी की थी।
                                                                
                
                
                 
                                    
                     
                                             
                                                
                                             
                                                
                                                                
                                        
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कानों में उंगलियां डालकर पढ़ता था...

8 वर्ष पहले

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