मैं मणिपुर राजपरिवार में पैदा हुई। मेरे पिता राजपरिवार में पश्चिमी शिक्षा प्राप्त पहले व्यक्ति थे, जबकि मेरी मां खुद हमारी आधुनिक शिक्षा-दीक्षा के प्रति बेहद सचेत थीं। मेरी पढ़ाई शिलांग और शांतिनिकेतन में हुई। यद्यपि मैं कला भवन में पेंटिंग और मूर्तिकला की छात्रा थी, लेकिन वहां रहते हुए मैं रवींद्र साहित्य और रवींद्र संगीत की गहराई से परिचित हुई। रवींद्र संगीत सुनना आज भी मेरी दिनचर्या का हिस्सा है। हालांकि मैंने प्रचुर अनुवाद किए, लेकिन रवींद्रनाथ के कुछ बांग्ला गीतों और बादल सरकार के चर्चित नाटक, एवं इंद्रजित का मणिपुरी में अनुवाद करते हुए मुझे परम संतुष्टि मिली। शांतिनिकेतन ने मुझमें संवेदना पैदा की।
बेशक मैं राजघराने से हूं...
बेशक मैं राजघराने से हूं, लेकिन मेरे लेखन में वामपंथी रुझान और आम आदमी का दर्द है, तो इसकी वजह यही है। ऐतिहासिक उपन्यास बोड़ो साहेब ओंग्बी सनातोम्बी ने साहित्य की दुनिया में मुझे व्यापक पहचान दिलाई। अपनी रचनाओं के जरिये मैंने मणिपुर की सच्चाई देश-दुनिया के सामने रखने की कोशिश की है। मैंने कई फीचर फिल्में और वृत्तचित्र बनाए हैं। इनमें से ज्यादातर मणिपुर से जुड़ी हैं। मैंने अपने पिता महाराज चूड़ाचंद सिंह कीस्मृति में जो किताब लिखी है, उसमें भी मणिपुर की राजनीतिक स्थिति, मणिपुरी परंपरा और आधुनिकता के बारे में मैंने विस्तार से लिखा है। मणिपुरी नाटक, संगीत, नृत्य और सिनेमा के क्षेत्र अगर मैं कुछ योगदान दे पाई हूं, तो इसे मैं अपना सौभाग्य समझती हूं।
-चर्चित मणिपुरी लेखिका।
8 वर्ष पहले
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