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फै़ज़ अहमद फ़ैैैज

मुड़ मुड़ के देखता हूं

फै़ज़ अहमद फै़ज़ अपनी रचनाओं का बहुत ख़राब पाठ करते थे

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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फै़ज़ अहमद फै़ज़ बहुत बड़े शायर और ग़ज़लकार थे लेकिन वह अपनी रचनाओं का बहुत ख़राब पाठ करते थे । प्रसिद्ध लेखक रवींद्र कालिया ने अपनी किताब गा़लिब छुटी शराब में इसका उल्लेख किया है। कालिया लिखते हैं कि 1981 के अप्रैल महीने के आखिरी हफ्ते की एक ऐतिहासिक शाम विभूति के घर फै़ज़ के नाम दर्ज हो गई ।  आगे पढ़ें

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