आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

...जब प्रगतिशील विचारों के चलते फ़हमिदा पाकिस्तान से निर्वासित हुईं और भारत में शरण लीं

 Fahmida Riaz
                
                                                         
                            पाकिस्तान की बेबाक शायर फहमीदा रियाज को अपने क्रांतिकारी बोलों की वजह से पाकिस्तान की सैनिक हुकूमत का दंश झेलना पड़ा था। प्रगतिशील  विचारधारा को पाकिस्तान में कभी पनपने नहीं दिया गया। 
                                                                 
                            

कट्टरपंथी ताकतों और सैनिक शासन का वहां हमेशा से आधिपत्य रहा है। नतीजा यह रहा कि 80 के दौर में पाकिस्तान के राष्ट्रपति जनरल जिया उल हक के शासन में उनको और उनके पति को निर्वासन के बाद भारत में शरण लेनी पड़ी थी।  

28 जुलाई 1946 को उत्तर प्रदेश के बरेली के रहने वाले साहित्यिक परिवार में जन्मी फ़हमीदा रियाज़ पाकिस्तान की बेहद चर्चित कवयित्री हैं। 

दिल्ली! तिरी छाँव बड़ी क़हरी 
मिरी पूरी काया पिघल रही 
मुझे गले लगा कर गली गली 
धीरे से कहे'' तू कौन है री?'' 

मैं कौन हूँ माँ तिरी जाई हूँ 
पर भेस नए से आई हूँ 
मैं रमती पहुँची अपनों तक 
पर प्रीत पराई लाई हूँ 

तारीख़ की घोर गुफाओं में 
शायद पाए पहचान मिरी 
था बीज में देस का प्यार घुला 
परदेस में क्या क्या बेल चढ़ी 

नस नस में लहू तो तेरा है 
पर आँसू मेरे अपने हैं 
होंटों पर रही तिरी बोली 
पर नैन में सिंध के सपने हैं 

मन माटी जमुना घाट की थी 
पर समझ ज़रा उस की धड़कन 
इस में कारूंझर की सिसकी 
इस में हो के डालता चलतन! 

तिरे आँगन मीठा कुआँ हँसे 
क्या फल पाए मिरा मन रोगी 
इक रीत नगर से मोह मिरा 
बसते हैं जहाँ प्यासे जोगी 

तिरा मुझ से कोख का नाता है 
मिरे मन की पीड़ा जान ज़रा 
वो रूप दिखाऊँ तुझे कैसे 
जिस पर सब तन मन वार दिया 
आगे पढ़ें

क्या गीत हैं वो कोह-यारों के 

8 वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर