शुरुआती उम्र में ही मुझमें किताबें पढ़ने की दिलचस्पी पैदा हो गई थी, क्योंकि मैंने हैंस क्रिश्चियन एंडर्सन की एक कहानी द लिटिल मरमेड (छोटी मत्स्यकन्या) पढ़ी, हालांकि वह कहानी अत्यंत दुखद थी। छोटी-सी मत्स्यकन्या एक राजकुमार से प्रेम करती थी, लेकिन वह उससे शादी नहीं कर सकती थी, क्योंकि वह मत्स्यकन्या थी। और यह इतनी दुखद कहानी थी कि मैं बता नहीं सकती।
चारों तरफ बेचैनी में भटकती रही...
खैर किसी तरह जब मैंने कहानी खत्म की, तो बहुत देर तक मैं अपने घर के चारों तरफ बेचैनी में भटकती रही। फिर मैंने उस कहानी को सुखांत बनाकर लिखा। वह कहानी मैंने कहीं प्रकाशित नहीं कराई, लेकिन मुझे लगता है कि मैंने उसके लिए सर्वोत्तम कोशिश की। मुझे इस बात की चिंता नहीं थी कि बाकी दुनिया इस नई कहानी को नहीं जान पाएगी, क्योंकि मैं सोचती थी कि यह कहानी एक बार प्रकाशित हो गई है। यह मेरे लेखन की पहली शुरुआत थी।
कहानी का अंत सुखद होना चाहिए...
लेखन के शुरुआती दिनों में मेरे लिए सबसे महत्वपूर्ण बात थी कि कहानी का अंत सुखद होना चाहिए। मुझे अपनी नायिकाओं के लिए कभी दुखद अंत बर्दाश्त नहीं होता था। बाद में जब मैं वुदरिंग हाईट्स जैसी किताबें पढ़ने लगी, तो मेरी कहानियों का अंत दुखांत होने लगा और मैं अपने विचार को पूरी तरह बदलकर त्रासदीपूर्ण कहानियां लिखने लगी, और इसमें मुझे आनंद आने लगा। मुझे अपनी नायिकाओं के लिए कभी दुखद अंत बर्दाश्त नहीं होता था। बाद में जब मैं वुदरिंग हाईट्स जैसी किताबें पढ़ने लगी, तो मेरी कहानियों का अंत दुखांत होने लगा और मैं अपने विचार को पूरी तरह बदलकर त्रासदीपूर्ण कहानियां लिखने लगी, और इसमें मुझे आनंद आने लगा।
दुनिया में कहानियां बहुत महत्वपूर्ण हैं...
कहानी लिखने के लिए मुझे किसी प्रेरणा की जरूरत नहीं थी, मैं सोचती थी कि दुनिया में कहानियां बहुत महत्वपूर्ण हैं और मैं उन कहानियों में से कुछ को अपने ढंग से लिखना चाहती थी। और मुझे किसी को इन कहानियों को बताने की जरूरत भी नहीं महसूस होती थी, लेकिन बाद में मुझे लगा कि अगर इन कहानियों को व्यापक पाठकों तक पहुंचाया जाए, तो वह दिलचस्प होगा।
-एलिस मुनरो, कनाडा की नोबेलजयी कथाकार
आगे पढ़ें
चारों तरफ बेचैनी में भटकती रही...
10 महीने पहले
कमेंट
कमेंट X