जिस समय भगत सिंह लगभग 4 साल के थे, तो एक दिन अपने बाबा के साथ लाहौर आए। सरदार कृष्म सिंह जी यहीं रहा करते थे। एक दिन सब लोग सरदार जी के मित्र मेहता आनंद किशोर जी के यहां गए। बालक भगत सिंह भी साथ में ही था। मेहता जी ने भगत सिंह को प्यार से गोद में बिठा लिया और उनसे पंजाबी में बात करने लगे। पूछा-
मेहता जी- तेरा नाम क्या है?
बालक- भगत सिंह।
मेहता जी- गांव में क्या करता है?
भगत सिंह- खेलता हूं, खेत पर जाता हूं।
मेहता जी- बड़ा होकर क्या करेगा?
भगत सिंह- खेती करूंगा।
मेहता जी- खेत में क्या बोएगा?
भगत सिंह- दबूंका (बंदूक) बोऊंगा।
भगत सिंह नहीं रहे लेकिन मेहता जी को हमेशा उनकी तोतली बोली शूल की तरह याद आती रही।
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7 वर्ष पहले
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