गणतंत्र दिवस समारोह के समापन को ‘बीटिंग द रिट्रीट’ कहा जाता है। इसे 29 जनवरी की शाम को आयोजित किया जाता है। यह न सिर्फ गणतंत्र दिवस समारोह के समापन का प्रतीक है बल्कि सेना को वापस बैरक में भेजने का आधिकारिक संदेश भी होता है। इस समारोह में देश की तीनों सेनाएं हिस्सा लेती हैं और पारंपरिक धुनों के साथ मार्चपास्ट करती हैं। यह सभी धुन सेनाओं के बैंड द्वारा बजायी जाती है और ‘अबाइड विद मी’ भी इसमें शामिल है।
क्यूं है फिर चर्चा में
अबाइड विद मी एक ईसाई भजन है जो राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को काफी पसंद था, जिसे 29 जनवरी को होने वाले बीटिंग रिट्रीट समारोह से हटा दिया गया है। भारतीय सेना द्वारा शनिवार को जारी एक ब्रोशर से यह जानकारी सामने आई है। 1847 में स्कॉटिश एंग्लिकन कवि और भजन विज्ञानी हेनरी फ्रांसिस लिटे द्वारा लिखित 'एबाइड विद मी', 1950 से बीटिंग रिट्रीट समारोह का हिस्सा रहा है।
अबाइड विद मी को स्कॉटलैण्ड के कवि हैनरी लाइट ने लिखा है। 1 जून 1793 को जन्मे हैनरी कवि होने के साथ-साथ चर्च के उस पादरी वर्ग में शामिल थे जिन्हें ‘एंगलिकन डिवाइन’ कहा जाता है। यानी जिनके लिखे धार्मिक लेख या कविताओं को धर्म के विश्वास व अध्यात्म का मानक माना जा सकता है।
थॉमस और एना की दूसरी संतान हैनरी को अपने माता-पिता का सुख नहीं मिला। पिता घर की जिम्मेदारियों को छोड़कर चले गए और मां का देहांत हो गया। 9 साल के अनाथ हैनरी को हेडमास्टर रोबर्ट बुरोज़ ने गोद लिया और उनकी पढ़ाई की ज़िम्मेदारी उठाई। बहुत ही कम उम्र में उनके पेशे का चुनाव दूसरों से अलग दिखाई देने लगा। वह कुछ अलग करना चाहते थे। इसी दौरान 1816 में उन्हें ईसाई धर्म प्रचारकों से संवाद का अनुभव हुआ जिसके बाद उन्हें लगा कि संत पॉल के काव्य-पत्रों को ठीक से नहीं समझा गया है।
इसके बाद लाइट ने बाइबिल को पढ़ा और उसका उपदेश देना शुरू कर दिया। वह उन स्थानीय पादरियों का अनुसरण करने लगे जिनके काव्य को वह कभी उपहास का पात्र समझते थे। 1817 में हैनरी, कोर्नवेल के मैराज़ियोन में उपपादरी नियुक्त हो गए। इसके बाद से भजन लिखने का क्रम भी शुरु हुआ।
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कवि हैनरी लाइट ने लिखा है इसे
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