मध्य यूरोप का साहित्य पश्चिमी देशों से बिल्कुल अलग है। हम सच्चाई पर भी
बहुत यकीन नहीं करते हैं। क्रमबद्ध तरीके से कहानी लिखना अच्छे साहित्य की
पहचान है, लेकिन हमारे अंदर इसके लिए जरूरी धैर्य नहीं है।
मेरा बचपन पश्चिमी पोलैंड के सुलेचाउ शहर में बीता है। मेरे पूर्वज इस
छोटे-से शहर में कभी शरणार्थी के तौर पर आकर बसे थे। वे पूर्वी पोलैंड के
उस इलाके में रहते थे, जो आज दुनिया के नक्शे में यूक्रेन का हिस्सा है।
मेरे माता-पिता शिक्षक थे, और ऐसी जगह रहते थे, जो वामपंथी बुद्धिजीवियों
का गढ़ था। इसी का प्रभाव था कि भविष्य में मेरे साहित्यकार बनने की संभावनाओं को बल मिला।
शुरुआत मनोचिकित्सक के रूप में...
साहित्य के क्षेत्र से जुड़ने से पहले मैंने पोलैंड की प्रतिष्ठित
यूनिवर्सिटी ऑफ वार्साव से मनोविज्ञान की पढ़ाई की। पढ़ाई के दौरान मैंने
लोगों की व्यावहारिक समस्याओं का गहन अध्ययन किया। स्नातक करने के बाद मैं
विभिन्न शहरों में रही, जहां मैंने अस्पतालों में थेरेपिस्ट के तौर पर काम
किया। एक साथी मनोचिकित्सक से शादी, फिर बेटे के जन्म के वक्त मुझे काम से
दूर रहना पड़ा। करीब पांच साल के अंतराल के बाद मैंने जीवन में रोचकता लाने
के लिए दोबारा अस्पताल में काम करने का फैसला लिया। लेकिन काम करने के
दूसरे दौर में मुझे मरीजों का साथ और परेशान करने लगा।
आखिरकार मैंने नौकरी छोड़कर अपनी कविताओं का संग्रह प्रकाशित कराया। ये
कविताएं मैंने तब लिखी थीं, जब मैं जीवन की चुनौतियों से परेशान होने लगी
थी। इसी काव्य संग्रह का अनुसरण करते हुए मैंने आगे चलकर अपना उपन्यास, द
जर्नी ऑफ द पीपल ऑफ द बुक लिखा, जो कि 17वीं सदी के फ्रांस की कहानी पर
आधारित था। मेरे पहले उपन्यास के लिए ही मुझे पुरस्कार से नवाजा गया। इसके
बाद तो किताबों और सम्मानों का एक सिलसिला चल निकला।
जीवन के चौथे दशक के मध्य में पहुंचने के बाद मैंने अपना कुछ वक्त यात्राओं
को देने का फैसला किया। मैं ताइवान, न्यूजीलैंड से लेकर मलयेशिया तक गई।
मेरा बेटा कई यात्राओं में मेरा सहयात्री बना। कई लोगों को मेरी हेयर
स्टाइल में काफी दिलचस्पी रही है। कुछेक ने तो यहां तक कहा कि मैंने यूरोप
को एक नई हेयर स्टाइल से परिचय कराया है। उनके मुताबिक, पोलिश टैंगल या
प्लिका पोलोनिका (बाल बांधने का एक विशेष तरीका) क्रूड ऑयल, पिरोजी (गुझिया
के आकार में यूरोपीय खाना) और वोदका की तरह हमारे अनूठे आविष्कारों में से एक है।
तीन साल पहले मुझे अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार-ब्रिज प्राइज से नवाजा गया था।
यह पुरस्कार उसे दिया जाता है, जिसके जीवन भर के काम ने विभिन्न यूरोपीय
लोगों के बीच की समझ बेहतर करने में योगदान दिया हो। मुझे इस काबिल इसलिए
समझा गया, क्योंकि ज्यूरी को लगा कि मेरा साहित्य जर्मनी, चेक गणराज्य और
पोलैंड की सीमाओं पर बसने वाले जुड़वा शहरों के बीच एक पुल की तरह काम कर
रहा है। विदेशों में पोलैंड की छवि बिगाड़ने का आरोप लगाकर मुझ पर दक्षिणी
पोलैंड में स्थित नोवा रूडा के कथित राष्ट्रवादियों ने हमला भी किया। मगर
मुझे पता है कि मैं असली राष्ट्रवादी हूं और मुझे अपने देश की फिक्र है।
-इस वर्ष के मैनबुकर पुरस्कार के लिए चुनी गई लेखिका के साक्षात्कारों पर आधारित।
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8 वर्ष पहले
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