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यारी है ईमान मेरा...दोस्ती को गुलजार करता यह नगमा

yari hai imaan mera
                
                                                         
                            
अगर मात्र धमनियों में बहते रक्त-प्रवाह के समान होने से समाज के रिश्ते स्थापित होते तो ये रक्त ही इंसानी जीवन का एक बड़ा अभिशाप होता क्योंकि वो संबंध जो बिना किसी स्वार्थ के स्थापित होता है और किसी भी समय हाज़िर रहता है, जो मुसीबतों में हल देता है और ख़ुशियों में साथ नाचता है उस रिश्ते के लिए ऐसी किसी भी शर्त का होना अनिवार्य नहीं है। वो भरोसे की नींव पर बनता है और वक्त के साथ जिसकी दीवारें और भी मजबूत होता जाती हैं।

वो रिश्ता है दोस्ती का जो समय की किसी भी इकाई से परे है क्योंकि न इस रिश्ते के बनने का कोई समय होता है और ना ही इस रिश्ते को निभाने में घड़ी के कांटों को देखा जाता है। अहं और अभिमान की सभी सीमाओं को लांघने वाला, तराजू के पलड़ों सा बराबर जिसमें सिवाय मन की तरंगों के और किसी वस्तु का कोई स्थान नहीं है। 

इन्हीं भावनाओं पर बना है यह गीत जो फ़िल्म ज़ंजीर में सुनाई दिया था। गाना है यारी है ईमान मेरा, यार मेरी ज़िंदग़ी इस गाने को मन्ना डे ने गाया है। इसे संगीत दिया है कल्याण जी- आनंद जी ने और बोल लिखे हैं गुलशन बावरा ने। पढ़िए और अपनी दोस्ती में रस भरिए  
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यारी है ईमान मेरा यार मेरी ज़िंदगी...

8 वर्ष पहले

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