खादी रंग की शर्ट पर आशिक़नुमा नीले रंग का स्कार्फ़ पहने एक युवक अपनी प्रेमिका के साथ कभी गाड़ी में घूमता है तो कभी समंदर किनारे बैठ जाता है। आंखों में प्रीत है, ज़ुबां पर गीत और हाथ में उस गाड़ी का स्टीयरिंग है जो उन्हें अतीत और भविष्य के तमाम जंजाल से निकालकर वर्तमान का भ्रमण करवा रही है। गाड़ी की कमान संभाले वह पीछे की सीट पर बैठी अपनी महबूबा को मोहब्बत के अलंकार में सजा रहा है।
आंखों की प्रीत की तो व्याख्या नहीं हो सकती कि जिस प्रेम को शब्दों की परिधि में बांधा जा सके वह जीवन को उन्मुक्त कैसे करेगा। लेकिन जो गीत वह गा रहा है उस पर चर्चा की जा सकती है, गीत में मन के एहसास बयां होते हैं। इससे ख़ूबसूरत सीरत की बयानगी और क्या होगी।
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