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Rakesh Dhar Dwivedi Poetry: तेरी यादें, तेरी बातें

कविता
                
                                                         
                            तेरी यादें, तेरी बातें ही 
                                                                 
                            
अब मेरा ठिकाना है,
तुझको नजरों में बसाया 
और दिल में उतारा है।

तेरी यादों के लश्कर 
जब ख्वाबों से गुजरे,
मैंने ख्वाबों में ही तुझको 
गले से लगाया है।

कैसे जीते हैं ये न पूछ
तेरी मौजूदगी के बगैर 
तेरी यादों के सहारे ही 
दिन गुजारे हैं। 

इस दुनिया में है सब फानी 
तेरी आंखों के सिवा, 
जिसमें मुझको उतरना 
और डूब जाना है।

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57 minutes ago

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