संसार के बाकी रिश्तों के इतर दोस्ती का संबंध ही एकमात्र ऐसा होता है जिसमें आप पूरे विश्वास के साथ अपने दुख-सुख का विनिमय कर सकते हैं। दोस्त मानो आपके मन की ही प्रतिकृति होते हैं जो आपके चेहरे से ही आपका हाल बता सकते हैं। ऐसे दोस्त ज़िंदगी से कम नहीं होते बल्कि कई दफ़ा वही हमारी ज़िंदगी भी बन जाते हैं। इस ख़ास रिश्ते पर शायरों ने तो बहुत कुछ कहा ही फ़िल्मों में भी कई गीत लिखे गए।
फ़िल्म: याराना (1981)
गीतकार: अंजान
तेरे जैसा यार कहाँ, कहाँ ऐसा याराना
याद करेगी दुनिया, तेरा मेरा अफ़साना
मेरी ज़िन्दगी संवारी, मुझको गले लगा के
बैठा दिया फ़लक पे, मुझे ख़ाक से उठा के
यारा तेरी यारी को, मैंने तो ख़ुदा मान
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शोले (1975) / गीतकार- आनंद बक्षी
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