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नजर के सामने, जिगर के पास...दिलदार का दिलकश दीदार... 

आशिकी
                
                                                         
                            1988 में 'कयामत से कयामत तक', 1989 में 'मैंने प्यार किया' और 1990 में 'आशिकी' फिल्म ने लगातार तीन साल इस देश में युवाओं को प्रेम और समर्पण से लबरेज कर दिया। इस दौर की यह 3 सफल फिल्में बॉलीवुड को प्रेम और मधुर गीत-संगीतों से सजी महफिल दी। आशिकी के गीतों ने तो 1990 में मोहब्बत की फिजा को जवां कर दिया। निर्देशक महेश भट्ट ने इस फिल्म के पोस्टर में ही नायक-नायिका को कपड़े में छिपा कर पेश किया। लोगों में इस वजह से उत्सुकता बढ़ गई। फिल्म के रिलीज होने से पहले ही गीत प्रसारित हो गए थे। मधुर संगीत और गीतों ने फिल्म के नायक-नायिकाओं के लिए और भी क्रेज बढ़ा दिया था। अनु अग्रवाल और राहुल राय ने भी शानदार अभिनय कर फिल्म की सफलता में चार चांद लगा दिए। फिल्म का एक गीत जो बहुत लोकप्रिय हुआ था वह था...
                                                                 
                            

नज़र के सामने जिगर के पास 
कोई रहता है वो हो तुम...
 

यह गीत प्रेमियों के लिए एक तरह से प्रेरणा और साहस है।

इस गीत ने 1991 में बेस्ट सांग का फिल्मफेयर अवार्ड जीता था। यह गीत प्रेमियों के लिए एक तरह से प्रेरणा और साहस है। फिल्म जब रिलीज हुई थी तब 15 साल का बावरा मन जिंदगी की इबारत समझने की जुगत कर रहा था। अन्य किशोरों से इतर मेरा मन ख्वाबों-ख्यालों में डूबा रहता था। लिहाजा यह गीत मन को सुकून देता रहा। उस दौर में कयामत से कयामत तक, मैंने प्यार किया और फिल्म आशिकी मन मस्तिष्क पर प्यार का गहरा असर छोड़ गई थीं।

 
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यह गीत प्रेमियों के लिए एक तरह से प्रेरणा और साहस है।

8 वर्ष पहले

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