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हिंदी सिनेमा में महिलाओं के लिखे गीत, जिनमें से अधिकतर पुरुषों ने ही लिखे हैं

International Womens day 2019 Bollywood songs for women
                
                                                         
                            

समाज में घटित होने वाली किसी भी घटना को अभिनीत कर उसे दर्शकों के सामने संदेश देने के लिए सिनेमा एक सशक्त माध्यम है। इसलिए सिनेमा में महिलाओं पर और उनकी स्थिति पर भी ख़ूब फ़िल्में बनीं और उतने ही गीत भी लिखे गए हैं। ये गीत सिर्फ़ महिला गीतकारों ने ही नहीं लिखे बल्कि पुरुषों ने भी महिलाओं के लिए लिखा है।
 

फ़िल्म- चक दे इंडिया 
गीतकार- जयदीप साहनी


सोचा कहाँ था, ये जो, ये जो हो गया
माना कहाँ था, ये लो, ये लो हो गया
चुटकी कोई काटो, ना हैं, हम तो होश में
क़दमों को थामो, ये हैं उड़ते जोश में
बादल पे पाँव है, या छूटा गाँव है
अब तो भई चल पड़ी, अपनी ये नाव है
बादल पे पाँव है


गीतकार- स्वानंद किरकिरे

ओ री चिरैया, नन्ही सी चिड़िया 
अंगना में फिर आजा रे 

अँधियारा है घना और लहू से सना,
किरणों के तिनके अम्बर से चुन के 
अंगना में फिर आजा रे 

हमने तुझपे हजारो सितम हैं किये,
हमने तुझपे जहां भर के ज़ुल्म किये 
हमने सोचा नहीं, तू जो उड़ जायेगी 
ये ज़मीं तेरे बिन सूनी रह जायेगी,
किसके दम पे सजेगा मेरा अंगना 

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गीतकार- स्वानंद किरकिरे

7 वर्ष पहले

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