समाज में घटित होने वाली किसी भी घटना को अभिनीत कर उसे दर्शकों के सामने संदेश देने के लिए सिनेमा एक सशक्त माध्यम है। इसलिए सिनेमा में महिलाओं पर और उनकी स्थिति पर भी ख़ूब फ़िल्में बनीं और उतने ही गीत भी लिखे गए हैं। ये गीत सिर्फ़ महिला गीतकारों ने ही नहीं लिखे बल्कि पुरुषों ने भी महिलाओं के लिए लिखा है।
फ़िल्म- चक दे इंडिया
गीतकार- जयदीप साहनी
सोचा कहाँ था, ये जो, ये जो हो गया
माना कहाँ था, ये लो, ये लो हो गया
चुटकी कोई काटो, ना हैं, हम तो होश में
क़दमों को थामो, ये हैं उड़ते जोश में
बादल पे पाँव है, या छूटा गाँव है
अब तो भई चल पड़ी, अपनी ये नाव है
बादल पे पाँव है
आगे पढ़ें
गीतकार- स्वानंद किरकिरे
कमेंट
कमेंट X