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दरार क्यूं है

                
                                                         
                            तेरे मेरे दरम्यां,फांसले की दरार क्यूं है।
                                                                 
                            
तर्क-ए-ताल्लुक करके,शर्मसार क्यूं है।।

तेरे लौटने की उम्मीद, कायम है अभी।
हद से ज्यादा, तुझ पर एतबार क्यूं है।।

उजाले की जुस्तजू थी,अंधेरे ही मिले।
ये अंधेरे मगर इतने,मिलनसार क्यूं है।।

सुकूँ पाने को कहां जायें, बता दे हमे।
दिल का करार इतना, बेकरार क्यूं है।।

करीब से देखा तो, हैरान हो गये हम।
गैरों के लिए खुला,दर-ए-यार क्यूं है।।

मयकदों के तौर-तरीके,सख्त हो गये।
रौनकअफरोज फिर ये,दरबार क्यूं है।।

नश्तर के सिवा,जो कुछ दे नही पाते।
उस चारागर का हमे, इंतजार क्यूं है।।

तपते हुए लबों को,जाम नही मिला।
इस प्यास मे यूं इतना,खुमार क्यूं है।।

-यूनुस खान
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3 वर्ष पहले

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